‘हिन्दू पाकिस्तान हो जाये तो कम से कम यह संस्कार तो मिलेगा कि देश के नाम पर हम एकजुट रहेंगे’

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन कहते हैं भारत की रैंकिंग केवल पाकिस्तान से ऊपर। वे भी अपने ही गोल में गोल मार रहे हैं।

New Delhi, Jul 14 : सत्ता नही मिली तो देश पाकिस्तान हो जाएगा। सत्ता से बाहर कर दिया गया तो पाकिस्तान हस्तक्षेप कर सत्ता दिलाये।नौकरी नही तो देश मेरा नही । मुफ्त की विदेश यात्रा से महरूम हुए तो देश असहिष्णु हो गया । हिन्दू के लिए बोल दिया तो यह मेरा देश नही। बेरोजगार हैं तो देश छोड़ देंगे । महंगाई है तो देश मेरा नही । मंदिर के पक्ष में बोल दिया तो देश साम्प्रदायिक शक्तियों के हाथ मे। इस्लामी कट्टरवाद या इस्लाम के नाम पर हो रहे आतंक पर बोल दिया तो देश की गंगा जमुनी तहजीब पर खतरा। हमे तंग किया तो देश टूटने का खतरा ।

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देश नही हुआ फीफा का फुटबॉल हो गया। जिसे मन किया जिधर चाहे किक मार दिया। कभी लेफ्ट साइड के बाहर , तो कभी राइट साइड के बाहर कभी सामने के गोल में तो कभी अपनी ही गोल लाइन के बाहर। इसके बाद भी किसी ने नोटिस नही लिया तो अपने ही गोल में गोल मार दिए। फिलहाल तो यही हो रहा है कि अपने ही गोल में धकाधक गोल मारा जा रहा है। राजनीति तो पहले से बदनाम रही है । अब कौन सा क्षेत्र पवित्र रह गया है। फीफा 2018 में भी सबसे अधिक अपने ही गोल में गोल मारने वाले हो गए अब तक 11 , फाइनल बचले है। जब खेल में खेल हो रहा है तो राजनीति किस खेत की मूली।

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नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन कहते हैं भारत की रैंकिंग केवल पाकिस्तान से ऊपर। वे भी अपने ही गोल में गोल मार रहे हैं। दो दिन बाद ही खबर आई कि भारत ने फ्रांस को भी पछाड़ा। महबूबा कहती है हमे छेड़ा तो सलाउद्दीन पैदा हो जाएगा। अगर छेड़ने से ही सलाहुद्दीन पैदा होने लगे तो लाहौल विला कूवत! बाकी कुछ जरूरत ही नही। पत्नीहन्ता थरूर कहते हैं भारत हिन्दू पाकिस्तान हो जाएगा। हो जाये न । हो ही जाना चाहिए । अपने देश को लेके पाकिस्तानियों में भी इतना मतभेद नही। हिन्दू पाकिस्तान हो जाये तो कम से कम यह संस्कार तो मिलेगा कि देश के नाम पर हम एकजुट रहेंगे। और थरूर की हाँ में हाँ मिलाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति की टायर पंक्चरी मानसिकता को झेलते तो नही । जस्टिस गोगोई कहते हैं , जजो को ‘ नॉइज़ी ‘ मल्लब हल्ला गुल्ला करने वाला भी होना चाहिए।

मीलोर्ड अगर जजो को भी ऐसा ही होना है तो जज संसद में क्यों नही बैठ जाते। काम से ज्यादा हल्ला गुल्ला करते। करोड़ो लंबित केस तेल हांडा में जाये , गोगोई साहब गगाने ( सादरी में गगाने का मतलब रोना चिल्लाना ही होता है ) में मशरूफ । झारखंड की एक शीर्ष ब्यूरोक्रेट वंदना दादेल कहती है चर्च ने आदिवासियों का भला किया। दादेल की दलील भी गजब है। चर्च ने आदिवासियों को उनकी जड़ो से काट दिया और कहते है भला किया।
ऊपर के उदाहरण से साफ है कि देश के राजनीतिज्ञ ,अर्थशास्त्री ,बुद्धिजीवी , न्यायाधीश , नौकरशाह किधर गोल मार रहे हैं । बाकी कुछ बचा तो मीडियाई मार गयी ,मीडियाई मार गयी ।
जै हिन्द ,विश्राम ।

(योगेश किसलय के फेसबुक वॉ़ल से साभार, ये लेखक के निजी विचार हैं)