पहले ब्‍लैक फंगस, फिर वाइट फंगस और अब पीला फंगस, जानें क्‍या है अंतर और लक्षण, कैसे बचा जाए?

Black Fungus

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच ब्‍लैक, वाइट और यलो फंगस भी जान पर भारी बना हुआ है । ये तीनों फंगस क्‍या हैं और कितने खतरनाक हैं आगे पढ़ें ।

New Delhi, May 26: देश में कोविड संक्रमण के आंकड़े कुछ राहत भरे आने लगे हैं, लेकिन इसके साथ ही फंगस के मरीजों की संख्‍या बढ़ रही है । ब्‍लैक फंगस के अब तक 8 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं । वहीं व्‍हाइट फंगस का कहर भी जारी है । हालांकि इन दो संक्रमणों के अलावा अब एक तीसरा संक्रमण भी देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में ब्लैक और वाइट फंगस के बाद अब येलो फंगस का मामला भी सामने आया है। क्‍या है ये, विस्‍तार से आगे जानें ।

पीला कवक / यलो फंगस क्या है?
यबये पहले यलो फंगस को जानिए, ये संक्रमण ब्लैक या व्हाइट फंगस संक्रमण की तुलना में ज्‍यादा खतरनाक है, क्योंकि यह शरीर के आंतरिक अंगों को प्रभावित करता है। इसका एक मामला गाजियाबाद में सामने आया है ।
यलो फंगल इन्फेक्शन के कारण
दूसरे फंगल संक्रमणों की तरह यह भी मुख्य रूप से गंदगी के कारण होता है, दूषित भोजन-पानी भी प्रमुख कारण है । इसके साथ ही अधिक स्‍टेरॉयड का सेवन और एंटीबैक्‍टीरियल ड्रग्‍स का अति प्रयोग भी कारण हो सकता है । लो इम्‍यूनिटी के लोग इसकी चपेट में जल्‍दी आते हैं ।
लक्षण
यलो फंगस, आंतरिक रूप से शुरू होता है । यानी ये आपके शरीर को अंदर से घाव देता है, जिससे मवाद का रिसाव होता है । शरीर पर दूसरे घाव ठीक नहीं होते और अंग काम करना बंद कर देते हैं। शरीर गलने लगता है । इसके लक्षणों में मरीज को सुस्ती, भूख भी कम हो सकती है । वजन घटना या फूड प्‍वॉइजनिंग की समस्‍या हो सकती है । कुछ मामलों में ये रोगी की आंखों पर असर डाल सकता है । आंखें लाल होना और आंखों का धंसना इसके लक्षण होते हैं ।

ब्लैक फंगस इन्फेक्शन क्या है?
कोविड संक्रमण के बाद सबसे ज्‍यादा रोगी म्यूकोर्मिकोसिस यानी ब्लैक फंगस के देखे गए । ये एक प्रकार का कवक होता है । ये उन्‍हीं लोगों को प्रभावित करता है जो बहुत ज्‍यादा लो इम्‍यून हैं या जिन्‍हें डायबिटीज जैसे रोग हैं । डॉक्‍टरों के मुताबिक यह हवा के माध्यम से फैल सकता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ है तो इससे कोई समस्या नहीं होगी।
ब्लैक फंगस का कारण
कोविड-19 के इलाज के लिए जिन रोगियों को स्टेरॉइडल इंजेक्शन दिए गए उनमें इसका खतरा देखा गया है, दरअसल स्‍टेरॉयड सांस की नलियों की सूजन को कम करते हैं, लेकिन इनसे इम्‍यूनिटी कमजोर हो जाती है । इसके साथ ही वो लोग जो पहले से ही खराब किडनी फंक्शन या कैंसर के साथ मधुमेह, या स्टेरॉयड का लंबे समय से इस्‍तेमाल कर रहे हैं, उनमें इसका खतरा देखा गया है ।
लक्षण
ब्‍लैक फगस रोगी के साइनस और फेफड़ों को प्रभावित करता है । ये चेहरे के एक तरफ सूजन, गंभीर सिरदर्द, नाक की भीड़, नाक पर या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव, सीने में दर्द, सांस फूलना और आंखों की रोशनी को प्रभावित करने जैसे लक्षणों के साथ नजर आता है । इसके अलावा दांतों से चबाने, मुंह खोलने और दांतों को ढीला करने में भी कठिनाई पैदा करता है । डॉक्टरों के मुताबिक स्टेरॉयड का सही तरीके से इस्‍तेमाल, और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने से कोविड-19 मरीजों को ब्‍लैक फंगस से बचाया जा सकता है ।

वाइट फंगस इन्फेक्शन क्या है?
ब्लैक फंगस की तुलना में वाइट फंगस या एस्परगिलोसिस को खतरनाक बताया गया है, यह शरीर के कई हिस्सों जैसे कि नाखून, त्वचा, पेट, किडनी, मस्तिष्क और यहां तक ​​कि निजी अंगों को भी प्रभावित कर सकता है ।
कारण
दूसरे फंगस की तरह सफेद फंगस भी लो इम्यून लोगों को चपेट में ले रहा है । वो लोग जो पहले से ही मधुमेह, कैंसर के मरीज है, लंबे समय से स्‍टेरॉयड ले रहे हैं या आईसीयू में हैं उनमें इसका खतरा देखा गया है ।
लक्षण
सफेद फंगस का संक्रमण मरीज में जीभ या फिर प्राइवेट पार्ट से शुरू होता है, जिसकी वजह से यह जीभ को सफेद कर देता है ।इस बीमारी के लक्षण SARS-CoV2 यानी कोविड संक्रमण के समान ही हैं। यह भी फेफड़ों पर हमला करता है और सीटी स्कैन टेस्ट करके इसका पता लगाया जा सकता है। इसके प्रमुख लक्षणों में खांसी, बुखार, दस्त, फेफड़ों पर काले धब्बे, ऑक्सीजन का स्तर कम होना है।
(ये जानकारी इंटरनेट रिसर्च पर आधारित है, सटीक जानकारी के लिए स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की वेबसाइट से जानकारी जुटाइ र्जा सकती है)