अमेठी में मनोहर पर्रिकर की मूर्ति लगवाना चाहते हैं ग्रामीण, वजह जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

दरअसल मनोहर पर्रिकर यूपी से राज्यसभा सांसद बनने के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में रक्षामंत्री बने थे । पर्रिकर ने इन दो गांवों को गोद क्‍या लिया इनकी काया ही पलट दी ।

New Delhi, Mar 20 : अमे‍ठी राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है, अब ऐसे में यहां भाजपा के दिवंगत नेता की मूर्ति लगाने की मांग उठना, खबर वाकई दिलचस्‍प है । राहुल गांधी के गढ़ अमेठी में बरौलिया और हरिहरपुर गांव के लोगों ने गोवा के दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को लेकर एक खास बात साझा की है । इन गांवों में रहने वाले अपने गांव में मनोहर पर्रिकर की मूर्ति लगवाना चाहते हैं । गांव वालों ने इसके लिए मुख्‍यमंत्री से भी अपील की है, अगर पैसा सरकार द्वारा नहीं दिया जाता तो ग्रामीण खुद से पैसा इकठ्ठा कर खर्च करने के लिए भी तैयार हैं ।

पर्रिकर ने गोद लिए थे दोनों गांव
दरअसल इन ग्रामीणों का पर्रिकर के प्रति प्रेम यूं ही नहीं है । साल 2015 में बरौलिया और उसकेबाद 2017 में हरिहरपुर गांव को गोद लिया था । दरअसल मनोहर पर्रिकर यूपी से राज्यसभा सांसद बनने के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में रक्षामंत्री बने थे । पर्रिकर ने इन दो गांवों को गोद क्‍या लिया इनकी काया ही पलट दी ।

गांवों की बदली दशा
ग्रामीण भी ये बात कहते हैं कि पर्रिकर के इन गांवों को गोद लेने के बाद से इन गांवों की काया ही पलट गई । गांवों को अच्छी सड़कें मिलीं, स्कूल शूरू किए गए । साथ ही सोलर लाइटें लगाई गईं । क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट कैंप भी लगवाए, साथ ही सरकारी प्राथमिक स्कूलों और तालाबों का सौंदर्यीकरण भी  करवाया गया । पर्रिकर लगातार इन गांवों के ग्रामीणों के संपर्क में रहे । गोवा का मुख्‍यमंत्री बनने के बाद भी उन्‍होने इन गांवों से संपर्क साधे रखा और गांव के विकास में काम करते रहे । उन्‍होने ग्रामीणों को दिल्‍ली तक बुलाया ताकि गांव में उन योजनाओं को पहुंचाया जा सके जिनसे शहरों में विकास हो सके ।

ग्रामीणों ने की अपील
पर्रिकर के निधन के बाद इन दोनों गांव में शोक का माहौल है । ग्रामीण अब अपने नेता की मूर्ति लगवाना चाहते हैं । उनके निधन के बाद अमेठी के ग्रामीण केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से अपील करना चाहते हैं और दोनों गांव में पर्रिकर की मूर्ति लगवाने की योजना बना रहे हैं । ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकारी मदद और फंडिंग से मूर्ति बनवाईं जाए तो अच्‍छा है अगर ऐसा नहीं हो पाएगा तो वो खुद पैसा इकठ्ठा कर मूर्ति बनवा लेंगे ।