इमरजेंसी के दौर में अटल जी ने कही थी ऐसी बात कि जनता भी हो गई थी उनके जोश और जुनून की दीवानी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हालत गंभीर बनी हुई है । उनकी सेहत में सुधार के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं । उन्‍हें लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम पर रखा गया है ।

New Delhi, Aug 16 : भारतीय जनता पार्टी के दिग्‍गज नेता और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कई समस्‍याओं से जूझ रहे हैं । वाजपेयी जी 93 वर्ष के हैं और पिछले कुछ समय से किडनी ट्रैक्ट इंफेक्शन, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब आने में दिक्कत और सीने में जकड़न की शिकायत से जूझ रहे हैं । उन्‍हें 11 जून को दिल्‍ली स्थित एम्‍स में भर्ती कराया गया है । एम्स की ओर से बुधवार शाम आए बयान में कहा गया कि ‘दुर्भाग्यवश, उनकी हालत बिगड़ गई है. उनकी हालत गंभीर है और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया है.’

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दिग्‍गज नेता रहे हैं अटल जी
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के ही नहीं बल्कि देश के उन चुनिंदा नेताओं में एक हैं जिन्‍हें सुनने के लिए जनता की भीड़ स्‍वयं ही उमड़ जाया करती थी । उनके भाषण आज भी अमर है, उनके कहे हुए उक – एक शब्‍द लोगों को नए उत्‍साह से भर दिया करते थे । उनका भाषण किसी चुनावी रैली में हो, नेता प्रतिपक्ष के तौर पर हो, संयुक्‍त राष्‍ट्र के पटल पर या फिर किसी और जगह, उनके शब्‍द लोगों का दिल जीत लिया करते थे ।

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इमरजेंसी के समय अटल जी के वो शब्‍द
साल 1975 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी । उस दौरान विपक्षी दलों के नेताओं ने जोर-शोर से इसका विरोध किया था । भारी विरोध के चलते इंदिरा गांधी को झुकना पड़ा और 1977 में उन्‍होने चुनाव का ऐलान किया गया था । देश में इमरजेंसी खत्म होने पर दिल्ली के रामलीला मैदान में एक महा रैली का आयोजन किया गया था । जहां अटल जी ने अपने शब्‍द रखे थे ।

लगने लगे थे अटल बिहारी जिंदाबाद के नारे
मंच पर जब अटल बिहारी वाजपेयी पहुंचे और उन्‍होने बोलना शुरू किया तो मानो पूरा माहौल ही बदल गया । इंदिरा गांधी मुर्दाबाद और अटल बिहारी जिंदाबाद के नारों के बीच उन्‍होने भीड़ को शांत रहने का इशारा किया । अपने खास अंदाज में वो फिर बाले – ‘बाद मुद्दत मिले हैं दीवाने.’ इतना कहकर वो फिर शांत हो गए । कुछ देर चुप रहकर फिर कहा – ‘कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने.’ भीड़ फिर से नारे लगाने लगी । इसके बाद फिर वाजपेयी ने कहा- ‘खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी भला कौन जाने.’

ये तीन लाइनें सब कुछ कह गईं
अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा कही गई ये तीन लाइनें मानों इमरजेंसी खत्‍म होने पर सब कुछ कह गईं । उन्‍हें सुनने के लिए मौजूद जनता ने इतने नारे लगाए कि वाजपेयी जी को फिर कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ी । पूरा देश उन्‍हें सुनना चाहता था, उनके भाषण का अंदाज सबसे निराला था । कुछ सोचकर, ठहराव देकर उनके बातों को कहने का अंदाज लाजवाब था । अटल जी के भाषण, उनकी कविताएं लोग आज भी सुनते हैं ।