जेल से रिहा होते ही बीजेपी के खिलाफ गरजे रावण, लेकिन मायावती के लिये बन सकते हैं ‘खतरा’

कुछ लोगों का मानना था कि रावण को जान-बूझकर समय से पहले जेल से रिहा करवाया गया है, ताकि लोकसभा चुनाव में दलित वोटों का बंटवारा किया जा सके।

New Delhi, Sep 14 : भीम आर्मी के प्रमुख युवा नेता चंद्रशेखर उर्फ रावण जेल से रिहा हो गये हैं, गुरुवार-शुक्रवार रात 2.40 बजे उन्हें सहारनपुर जेल से रिहा किया गया, सैकड़ों समर्थकों ने जय भीम के नारे के साथ उनका स्वागत किया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। आपको बता दें कि पिछले साल सहारनपुर में दलितों और राजपूतों के बीच लड़ाई हो गई थी, तब भीम आर्मी पहली बार सुर्खियों आया था, इसी दल के संस्थापक हैं चंद्रशेखर उर्फ रावण।

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मायवती को लग रहा खतरा
पिछले दिनों सहारनपुर में मायावती ने जनसभा के दौरान कहा था कि किसी संगठन के बजाय बसपा के बैनर तले कार्यक्रम करो, किसी की भी हिम्मत नहीं होगी रोकने की, बसपा प्रमुख के बयान से साफ दिखता है कि उन्हें भीम आर्मी के पॉपुलर होने से खतरा महसूस हो रहा है, उन्हें लग रहा है कि दलित कहीं बसपा छोड़ किसी दूसरे संगठन की ओर ना चले जाएं, इसी वजह से वो रावण को लेकर असहज महसूस कर रही हैं।

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दलित वोट बैंक
यूपी में दलितों को वोट बैंक माना जाता है, अभी तक ये बसपा का आधार वोट बैंक माना जाता था, हालांकि पिछले दो चुनावों में दलितों के वोटों में बंटवारा हुआ है, जिसकी वजह से मायावती का सियासी कद भी घटा था, ना तो उनकी पार्टी का लोकसभा में एक भी सांसद है, और विधानसभा में भी मायावती 19 सीटों तक सिमट कर रह गई है। इसी वजह से वो अपने खोये जनाधार को पाने के लिये दुबारा से कोशिश कर रही है।

तेजी से पॉपुलर हो रहे रावण
पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर रावण के समर्थन में एक विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें यूपी के अलावा कुछ दूसरे प्रदेशों से भी दलित पहुंचे। सहारनपुर हिंसा के बाद सुर्खियों में आये चंद्रशेखर की बढती ताकत से दूसरे राजनीतिक दलों को भी खतरा महसूस हो रहा है। क्योंकि रावण के पीछे काफी संख्या में दलित खड़े दिख रहे हैं, कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भीम आर्मी चुनाव लड़ सकती है।

बीजेपी को हराना मकसद
जेल से रिहा होने के बाद चंद्रशेखर उर्फ रावण ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना उनका मकसद है, भीम आर्मी तो उम्मीदवार खड़ी नहीं करेगी, देश में बीजेपी के खिलाफ बनने वाले महागठबंधन को ये संगठन सपोर्ट करेगी। इसके साथ ही जल्द से जल्द बहुजन समाज को जागरुक करने के लिये भीम आर्मी अभियान चलाएगी। रावण ने बसपा सुप्रीमो को बुआ बताते हुए कहा कि उनसे मेरा कोई विरोध नहीं है, बुआ ने हमारे समाज के लिये अच्छा काम किया है।

मायावती के वोट बैंक में सेंधमारी
आपको बता दें कि कुछ लोगों का मानना था कि रावण को जान-बूझकर समय से पहले जेल से रिहा करवाया गया है, ताकि लोकसभा चुनाव में दलित वोटों का बंटवारा किया जा सके, लेकिन जिस तरह से जेल से रिहा होने के बाद रावण बीजेपी पर हमलावर है, उनके तेवर कुछ और ही बयां कर रहे हैं, हालांकि कहा जा रहा है कि ये सब रणनीति का हिस्सा है, आने वाले दिनों में ऊंट किस करवट बैठती है, ये देखना दिलचस्प होगा।