क्या होती है सरोगेसी जिससे प्रियंका चोपड़ा बनीं मां, भारत में क्या हैं इसके नियम?

सरोगेसी से मां बनीं प्रियंका चोपड़ा ने ये खुशी फैंस के साथ शेयर की है । आखिर क्‍या है ये तरीका जो आजकल बहुत ज्‍यादा चलन में आ गया है । आगे पढ़ें विस्‍तार से ।

New Delhi, Jan 22: देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा और उनके अमेरिकन हस्‍बैंड निक जोनस पैरेंट्स बन गए हैं । लेकिन प्रियंका ना तो गर्भवती हुईं और ना ही उन्‍होंने बच्‍चे को जन्‍म दिया, पीसी ने भी सरोगेसी तकनीक का सहारा लिया और अब वो मां बन गई हैं । सरोगेसी के जरिए मां बनने वालीं प्रियंका अकेली नहीं हैं । उनसे पहले शाहरुख खान, तुषार कपूर, एकता कपूर, करण जौहर, प्रीति जिंटा, शिल्पा शेट्टी, आमिर खान और सनी लियोन जैसे कई दूसरे सेलेब भी सरोगेसी की मदद से पैरेंट्स बन चुके हैं । चलिए आगे आपको बताते हैं कि आखिर सरोगेसी क्या होती है, और हमारे देश में इसे लेकर क्या नियम हैं।

सरोगेसी क्या है?
सरोगेसी के द्वारा बच्‍चा पैदा करने का मतलब है, किसी महिला की कोख किराए पर लेना । यानी, जब कोई कपल पैरेंट बनना चाहता है लेकिन महिला खुद गर्भ नहीं धारण करना चाहती या उसे किसी तरह की कोई समस्‍या होती है तो वो किसी दूसरी महिला की कोख किराए पर लेते हैं और तकनीक की सहायता से कपल के लिए गर्भ धारण करती है । सरोगेसी में कोई महिला अपने या फिर डोनर के एग्स के जरिए किसी दूसरे कपल के लिए प्रेग्नेंट होती है । अपनी कोख में दूसरे का बच्चा पालने वाली महिला को सरोगेट मदर कहा जाता है।

एग्रीमेंट के तहत होती है सरोगेसी
इस तकनीक की मदद से बच्चे की चाह रखने वाले कपल और सरोगेट मदर के बीच एक एग्रीमेंट किया जाता है । जिसके तहत, प्रेग्नेंसी से पैदा होने वाले बच्चे के कानूनन माता-पिता सरोगेसी कराने वाले कपल ही होते हैं । सरोगेट मां को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखने और मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे दिए जाते हैं ताकि वो गर्भावस्था में अपना ख्याल रख सके ।
सरोगेसी दो तरह से होती है, एक ट्रेडिशनल सरोगेसी जिसमें होने वाले पिता या डोनर का स्पर्म सरोगेट मदर के एग्स से मैच कराया जाता है । इस सरोगेसी में सरोगेट मदर ही बॉयोलॉजिकल मदर होती है । दूसरी जेस्टेशनल सरोगेसी होती है जिसमें सरोगेट मदर का बच्चे से संबंध जेनेटिकली नहीं होता है । यानी प्रेग्नेंसी में सरोगेट मदर के एग का इस्तेमाल नहीं होता है, इसमें होने वाले पिता के स्पर्म और माता के एग्स का मेल या डोनर के स्पर्म और एग्स का मेल टेस्ट ट्यूब कराने के बाद इसे सरोगेट मदर के यूट्रस में प्रत्यारोपित किया जाता है ।

भारत में सरोगेसी के ये हैं नियम
सरोगेसी के लिए पहले विदेशियों द्वारा भारत की गरीब महिलाओं का इस्‍तेमाल किया जाता रहा है, ऐसे कई मामलों में धोखाधड़ी होने के बाद भारत में सरोगेसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए तमाम नियम तय किए गए हैं । अब सरकार की ओर से इस तरह की कॉमर्शियल सरोगेसी पर लगाम लगा दी गई है । 2019 में ही कॉमर्शियल सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसके बाद सिर्फ मदद करने के लिए ही सरोगेसी का विकल्प खुला रह गया है । नियम के तहत विदेशियों, सिंगल पैरेंट, तलाकशुदा जोड़ों, लिव-इन पार्टनर्स और एलजीबीटी समुदाय से जुड़े लोगों के लिए सरोगेसी के रास्ते बंद कर दिए गए हैं, अब सरोगेसी के लिए सरोगेट मदर के पास मेडिकल रूप से फिट होने का सर्टिफिकेट होना चाहिए, तभी वह सरोगेट मां बन सकती है । इसके साथ ही सरोगेसी का सहारा लेने वाले कपल के पास इस बात का मेडिकल प्रमाण पत्र होना चाहिए कि वो नैचुरल रूप से मां-बाप नहीं बन सकते हैं ।
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