ईश्‍वर से प्रार्थना के हैं ये 5 नियम, फॉलो करें और प्रभु कृपा प्राप्‍त करें

भगवान के पास अपनी गुहार लगाने का, अपनी प्रार्थनाओं को पहुंचाने का एक तरीका है पूजा, इस पूजा में कोई कमी ना रह जाए इसके लिए आपको कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए ।

New Delhi, May 16 : हमारे धर्म ग्रंथों, शास्त्रों में कई ऐसी बातें बताई गयी है जो ईश्वर के और करीब जाने में, उन तक हमारी बात पहुंचाने में मदद करती हैं, इन्हीं में से एक तरीका बताया गया है पूजा, प्रार्थना ।  प्रतिदिन सुबह स्नान आदि करने के बाद हिन्दू परिवारों में पूजा करने की परंपरा है । भगवान को भोग लगाना, उनसे आशीर्वाद लेना ये हिन्दू परिवारों के दिन की शुरुआत का तरीका है । शास्त्रों में पूजा से जुड़े कुछ विशेष नियम बताये गए हैं । आप भी जानिए और लाभ उठाइये ।

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सर्वप्रथम करें पंचदेवों की आराधना
किसी भी तरह की पूजा करने से पहले पंचदेवों का ध्यान करना ज़रूरी बताया गया है . शास्त्रों में सूर्य, गणेश, दुर्गा, शिव और हरी विष्णु को पांच देव कहा गया है. इन देवों का ध्यान कर ही कोई भी पूजा शुरू करनी चाहिए. शुभ कार्यों में पांच देवों का ध्यान ना करने से व्यवधान उत्पन्न हो सकते है. भगवान को धन्यवाद कहने का ये एक तरीका है. इसे कभी भी भूलें नहीं.

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बिना नहाये की हुई पूजा स्वीकार नहीं होती
शास्त्रों में कहा गया है, जो लोग बिना नहाये भगवान को भोग लगते हैं, या पुष्प तोड़कर उन्हें अर्पित करते हैं उनकी पूजा भगवान स्वीकार नहीं करते. मान्यता है कि ऐसा करने वाले व्यक्ति कि पूजा देवता ग्रहण ही नहीं करते और उसे पूजा का कोई फल प्राप्त नहीं होता . ऐसा करना पाप की श्रेणी में आता है. ईश्वर को नहा-धोकर स्वच्छ होकर ही कुछ भी अर्पित करना चाहिए .

दीपक स्वयं से कभी ना बुझाएं
हिन्दू धर्म में दीपक की बड़ी महत्ता है. अन्धकार को दूर कर प्रकाश लाने वाले दीपक के बारे में नियम ये है कि इसे कभी भी स्वयं से नहीं बुझाना चाहिए. जलते हुए दीपक से कभी अगरबत्ती या धूपबत्ती नहीं जलानी चाहिए. शुद्ध घी का दीपक पूजा में अपनी दायीं ओर और तेल का दीपक अपनी बायीं ओर प्रज्वलित करें .अपनी सामर्थ्य के अनुसार दीपक जलाएं. तेल या घी नहीं प्रभु आपकी श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं.

इन बातों का भी रखें ख्याल
पूजा करते हुए ध्यान रहें कि आपके पैरों में चप्पल, जूते आदि ना रह जाएं. घर के मंदिर में पूजा करते हुए भी चमड़े की बेल्ट और पर्स को अलग निकल कर रख दें . पूजा के समय इन चीज़ों का प्रयोग वर्जित माना जाता है . आपने ये बात कई बड़े मंदिरों में नोटिस की होगी कि गेट में घुसते ही आपसे ये चीज़ें उतरवा ली जाती हैं. अपने घर के मंदिर में भी इन बातों का ख्याल रखें. छोटी-छोटी बातें ही आपको ईश्वर की कृपा का पत्र बनाती हैं.

प्रसन्न मन से करें पूजा- अर्चना
आपकी पूजा के दौरान कोई आपके निकट आ जाएं और आप उस पर चिल्ला पड़ें तो आपके पूजा करने का क्या फायदा. आपका मन शांत नहीं होगा तो आप ईश्वर में ध्यान कैसे रमा पाएंगे. शांत मन और भाव से की गयी पूजा ही फलदायी होती है. पूजा करते समय किसी को डांटे फटकारे नहीं. खुद पर काबू रखें और प्रसन्न मन से ईश भक्ति में लग जाएं.